जिसके प्रतीकात्मक स्वरूप इस प्रकार होगा ।
मुख्य ठाकुर जी श्री ललित बिहारी बिहारीनी जू सरकार
प्रतीक चिन्ह: नीचे प्रस्तुत फोटो जिसमें
श्री ललित बिहारी बिहारीनी जू पान का भोग लगाते है । तथा खिलते हुए कमल में विराजमान है ।
प्रतीक गान :गोवर्धन वासी सावरे तुम बिन रहयो न जाए ।।
ध्वज पताका :पीत ध्वज (प्रथम फॉर्मेट)
पत्र: श्वेत पत्र तथा पीत पत्र
भोर स्तुति : जय जय सुर नायक ....
गौधुलि स्तुति : जय राम रमा रम रम शरणम !!
वाक्य: श्री ललित बिहारी विहारिनी जू विजयते
भाव: सर्व महत्मन समभाव ।।
पुष्प: कमल पुष्प
निर्माण कार्य प्रारंभ तथा स्थापना द्वारा श्री गिर्राज जी महाराज :तथा श्री श्री १००९ श्री महामंडलेशवर श्री मिथिला शरण दास जी महाराज के कर कमलों से
संचालन : श्री ललित बिहारी बिहारनी जू द्वारा
सेवाएं : गौ सेवा तथा संत सेवा, ठाकुर सेवा
मुख्य महन्त : सकेतवासी परमपूज्य श्री संजय कुमार अध्वर्यु जी
| हमारी ललित बिहारी सरकार का गिरिराज भवन छवि |
मुख्य स्तुति
छन्द:
जय राम रमारमणं समनं | भव ताप भयाकुल पाहि जनं ||
अवधेस सुरेस रमेस विभो | सरनागत मागत पाहि प्रभो ||१||
दस सीस बिनासन बीस भुजा | कृत दूरी महा माहि भूरी रुजा |
रजनीचर बृंद पतंग रहे | सर पावक तेज प्रचंड दहे ||२||
महि मंडल मंडन चारूतरं | धृत सायक चाप निषंग बरं |
मद मोह महा ममता रजनी | तम पुंज दिवाकर तेज अनी ||३||
मनजात किरात निपात किए | मृग लोग कुभोग सरेन हिए |
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे | विषया बन पाँवर भूली परे ||४||
बाहु रोग बियोगन्हि लोग हए |भवदंध्री निरादर के फल ए |
भव सिंधु अगाध परे नर ते | पद पंकज प्रेम न जे करते ||५||
अति दीन मलीन दुखी नितहीँ | जिन्ह के पद पंकज प्रीती नहीं |
अवलंब भवंत कथा जिन्ह कें | प्रिय संत अनंत सदा तिन्ह कें ||६||
नहीं राग न लोभ न मान मदा | तिन्ह कें सम वैभव वा विपदा |
एहि ते तव सेवक होत मुदा | मुनि त्यागत जोग भरोस सदा ||७||
करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ |पद पंकज सेवत सुद्ध हिएँ |
सम मानी निरादर आदरही | सब संत सुखी बिचरंति महि ||८||
मुनि मानस पंकज भृंग भजे | रघुवीर महा रनधीर अजे |
तव नाम जपामि नमामि हरी | भव रोग महागद मान अरी ||९||
गुन सील कृपा परमायतनं | प्रनमामि निरंतर श्रीरमणं |
रघुनंदन निकंदय द्वन्दधनं | महि पाल बिलोकय दीन जनं ||१०||
दोहा:
बार बार बर मांगऊ हारिशी देहु श्रीरंग |
पदसरोज अनपायनी भागती सदा सतसंग ||
बरनी उमापति राम गुन हरषि गए कैलास |
तब प्रभु कपिन्ह दिवाए सब बिधि सुखप्रद बास||






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